कहानी बंदर के सौदागर की


यह कहानी है एक ऐसे गांव की जहां हर कोई ठगा जाता है। ठगने वाला बाहर से आता है और लुभावने वादों के साथ ठग कर चला जाता है। जो लोग ठगे जाते हैं वे वहीं डटे रहकर फिर से ठगे जाने का इंतजार करते हैं। इस उम्‍मीद में कि किसी दिन वे भी किसी को ठग लेंगे।

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